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यह नयी वेबसाइट क्यों  ?

 

   अयोध्या में छह दिसम्बर 1992 को विवादित बाबरी मस्जिद  विध्वंस के बाद बना अस्थायी राम मंदिर

आपके मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि तमाम नयी -पुरानी सामग्री लेकर यह वेबसाइट क्यों बनायी गयी ? विशेषकर तब जबकि हज़ारों वेबसाइट बाज़ार में मौजूद हैं।दरअसल यह वेबसाइट उन तमाम सरोकारों का संग्रह है जिनसे मेरा जीवन जुड़ा रहा। विद्यार्थी जीवन में सर्वोदय और जेपी आंदोलन से जुड़ना और फिर आपातकाल में जेल से रिहा होने के बाद लोक हितकारी पत्रकारिता और निर्दलीय  सामाजिक आंदोलन।

दूधवा में बिली अर्जुन सिंह से साक्षात्कार

मैंने  1992 से 2013 इक्कीस वर्षों तक बी बी सी लंदन के लिए कार्य किया।बी.बी.सी. से पहले साप्ताहिक संडे मेल, दैनिक अमृत प्रभात और दैनिक भारत के लिए काम किया।पत्रकारिता की मेरी दीक्षा सर्वोदय आंदोलन में काम करते हुए “नगर स्वराज्य” पाक्षिक से हुई।

दशकों तक एशिया में बी बी सी की पहचान रहे मेरे मित्र मार्क टली

भारत और नेपाल  की राजनीति  में चार दशकों  में जो सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, प्रशासनिक  एवं आर्थिक परिवर्तन आये हैं उनका कवरेज करने का अनुभव प्रिंट, रेडियो , टीवी और ओनलाइन माध्यमों से  मिला।

 

कुम्भ मेला,अयोध्या विवाद, सामाजिक न्याय और दलित अधिकार आंदोलन उल्लेखनीय घटनाक्रम हैं।पूर्वांचल में  इंसेफलाइटिस की महामारी का गहन और विस्तृत कवरेज कर  विश्व स्तर की स्ववस्थ्य सन्थाओं का ध्यान खींचा।

पत्रकार के रुप में शासन प्रणाली,  संसदीय व्यवस्था, चुनाव, अपराध, वन पर्यावरण, शिक्षा , स्वास्थ्य और खेती और व्यापार  से जुड़े विषयों पर विशेष गहन कार्य किया है।

नेपाली नेता प्रचंड से अज्ञात स्थान पर भेंट वार्ता

नेपाल के राजनीतिक घटनाक्रम और माओवादी आंदोलन का विस्तृत कवरेज किया। जान का जोखिम लेकर पहाड़ी, जंगली गृहयुद्द प्रभावित क्षेत्रों में अन्दर तक गया । माओवादी  नेता प्रचंड का भूमिगत रहते हुए इंटरव्यू किया जबकि उनसे मिलना असंभव और जोखिम भरा काम था।

युवावस्था  में 1973 से 1975 तक इलाहाबाद से प्रकाशित पाक्षिक नगर स्वराज्य में काम करने का मौका मिला जिसकी प्रधान संपादक डा. महादेवी वर्मा, संपादक डा. रघुवंश और प्रकाशक सुप्रसिद्ध गांधीवादी विचारक गणितज्ञ प्रो. बनवारी लाल शर्मा थे.

सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन और जेपी द्वारा गठित छात्र युवा संघर्ष वाहिनी में सक्रिय भागीदारी तथा लोकतंत्र और विचार स्वातंत्र्य की प्रतिबद्दता के चलते  पूरी इमरजेंसी बनारस और नैनी सेंट्रल जेल में गुजारी.

1977 में देश में लोक तंत्र की बहाली के बाद बाद समाज सेवा के उद्देश्य से पूर्णकालिक पत्रकार बना .

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी किया है. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता शुरू कर दी थी।

2006 में पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दीसंस्थान ने गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया है. इसमें एक लाख रु नकद शामिल है.

2008 में  विशेष कार्यक्रम ‘आओ स्कूल चलें’ को प्रतिष्ठित एशिया ब्रॉडकास्टिंग यूनियन (एबीयू) अवार्ड के लिए चुना गया .इस कार्यक्रम में भारत में प्राथमिक शिक्षा की हालत की पड़ताल की गई थी.एबीयू मीडिया जगत का प्रतिष्ठित पुरस्कार है जो रेडियो और टीवी के बेहतरीन कार्यक्रमों को दिया जाता है।

 

1- भारत में श्रमजीवी पत्रकारों के सबसे पुराने  संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स IFWJ के राष्ट्रीय सचिव रहा  .

2- उ. प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष के रूप में  समाचार संकलन के कार्य को सुचारू बनाने के लिए राजनीतिक दलों , शासन और पुलिस के तालमेल से अनेक व्यवस्थागत सुधार किये.

3- यू.पी. प्रेस क्लब, लखनऊ के अध्यक्ष के रूप में  क्लब की प्रतिष्ठा बहालकर उसे समाज से जोड़ा. इससे प्रेस क्लब में साहित्यिक , सांस्कृतिक गतिविधियाँ बढ़ीं और आर्थिक निर्भरता आयी.

4- उत्तर प्रदेश पत्रकारिता संस्थान के उपाध्यक्ष और महासचिव के रूप में  सूचना के अधिकार एवं अन्य कई विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार कराये.

5-  लखनऊ शहर के पर्यावरण सुधार और गोमती सफाई के स्वैछिक आंदोलन में भी सक्रिय था .

6  गंगा , यमुना और गोमती नदियों के प्रदूषण और पर्यावरण पर लगातार और गहराई से अध्ययन तथा लेखन किया है.लोकतंत्र , प्रेस की स्वतंत्रता , सामाजिक समता और सौहार्द , समाज कल्याण , ग्राम स्वराज्य तथा रचनात्मक कार्यों में विशेष अभिरुचि एवं सक्रियता रहती है।

7 – एक नागरिक के नाते गुलिस्ताँ कालोनी के अध्यासियों को संगठित कर गुलिस्ताँ क्लब के माध्यम से बिजली, पानी, सड़क की सुविधाएँ सुधारने और खेल तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराए।

इन सभी पर जो कुछ मेरे पास  है उसकी बानगी और नयी सामग्री आपको समय – समय पर यहाँ मिलेगी।उम्मीद है यह वेबसाइट, विशेषकर नए पत्रकारों को,सम्बंधित विषयों पर संदर्भ और शोध के काम आएगी।

डिजिटल पत्रकारिता में मेरा हाथ तंग है और संसाधन न होने से टीम भी नहीं है। यह सब धीरे – धीरे होगा।तब तक त्रुटियों  के लिए क्षमा करें।

कृपया समय – समय पर अपडेट के लिए नोटिफ़िकेशन को अनुमति दें और अपनी समीक्षा कमेंट बाक्स में देते रहें, ताकि दोनो तरफ़ से नियमित

संवाद  होता रहे।

साभिवदन

राम दत्त त्रिपाठी

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