राजनीति

स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों पर चलने की ज़रूरत

लखनऊ ,1  मार्च।संसदीय लोकतंत्र , बालिग़ मताधिकार , सर्व धर्म सम भाव , न्याय , स्वतंत्रता , समानता , बंधुत्व , क़ानून का राज और अन्याय को बर्दाश्त न करना हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत हैं .भारत आज इस जिस संकट के दौर से गुजर रहा है , उससे उबरने में स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्श और जीवन मूल्य ही हमारा संबल हो सकते हैं .यह निचोड़ है आज प्रेस क्लब में हुई गोष्ठी का जिसका विषय था , “ स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत “

इस अवसर पर वयोवृद्ध समाजवादी नेता सग़ीर अहमद की पुस्तक “उम्मी अभी ज़िन्दा है “ का लोकार्पण भी हुआ .विचार गोष्ठी एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह कार्यक्रम का आयोजन रफी अहमद किदवई मांटेसरी मेमोरियल ट्रस्ट, लखनऊ एवं मौलाना अबुल कलाम आजाद एकेडमी, लखनऊ के तत्वावधान में किया गया।सैयद सगीर अहमद ने कहा आज की नस्ल को नसीहत देना है कि आपस में व्यवहार अच्छा रखें।श्री अहमद ने कहा कि दिल्ली के हालात में भी उम्मीद की किरणें दिखती हैं क्योंकि वहां पर दोनों वर्गों के लोगों ने एक दूसरे की मदद की है इसके लिए बधाई देता हूं।

रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी ईश्वर चंद द्विवेदी ने कहा कि हमें सत्य आयोग का गठन करना चाहिए ताकि लोग अपने-अपने तर्क और सबूत प्रस्तुत कर सकें और उस पर होने वाले विवाद समाप्त हो सके, जैसा दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला ने किया था।लखनऊ मांटेसरी इंटर कॉलेज के ट्रस्टी एवं अध्यक्ष नवीन चंद तिवारी ने कहा कि गांधीजी व अन्य महापुरुषों के विचारों को पढ़ना चाहिए। सेक्युलर तो राज्य होता है कोई व्यक्ति विशेष नही। उन्होंने कहा कि विचार, दर्शन के साथ आचरण पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।मौलाना अबुल कलाम आजाद एकेडमी के महासचिव डॉ हाशमी ने कहा कि देश की आजादी में सभी लोगों ने कुर्बानी दी थी और इस भाईचारे की विरासत को संजो कर ले चलना चाहिए, वरना उन महापुरुषों की कुर्बानी व्यर्थ हो जाएगी।’अभी उम्मीद जिंदा है’ किताब के संपादक धीरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि आजादी के समय का मिशन तो पूरा हो गया, लेकिन हमें अपने अंदर अपनी-अपनी उम्मीदें जागृत रखनी चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ पत्रकाररामदत्त त्रिपाठी ने कहा कि आजादी के आंदोलन में कई रोल मॉडल भी हमें मिले थे, उन सभी ने त्याग किया था किंतु आज उसका अभाव दिखता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र व वयस्क मताधिकार सबसे बड़ी विरासत रही है।

वरिष्ठ पत्रकार त्रिपाठी ने कहा कि सवाल पूछना भी हमारी विरासत है। हम यमराज से भी सवाल पूछते रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंद स्वराज में सवाल व जवाब के रूप में दर्शन और जानकारी दी गई है।

कम्युनिस्ट नेता अतुल अंजान ने कहा कि हम एक धर्म आधारित राज्य की ओर बढ़ रहे हैं। हमें बताना चाहिए की 1937 में मुस्लिम लीग के साथ मिलकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कोलकाता में सरकार बनाई थी।

गांधी ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा ने कहा कि गांधी जी ने जिस तरह से अंग्रेजों को बाहर निकाला उसी तरीके से आज हमें फिर से संघर्ष करने की जरूरत है आपसी भाईचारा बनाए रखना है।

पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा कि सर्वधर्म समभाव की रक्षा के लिए सभी को बाहर निकलना होगा।

जस्टिस वीडी नकवी ने कहा कि हिंदू मुस्लिम को मिलकर होली और ईद मनाना चाहिए तभी हमारी साझी पहचान बनी रहेगी।

गोरखपुर से आए सरदार देवेंद्र सिंह ने कहा कि पहले नेता ऐसे होते थे जिनका कोई बड़ा व्यापार या दुकान नहीं होता था इसलिए उनके पास खोने का डर नहीं रहता था अब तो सब व्यापारी हो गए हैं।

इसी तरह, वाराणसी से आये सलमान बशर ने कहा कि हमारे देश में लोकतंत्र है यही सबसे बड़ी विरासत है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुरेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि अन्याय व अत्याचार के खिलाफ लड़ने की गांधीजी की विरासत कहां गई, आज उसकी बहुत जरूरत है।

अन्य वक्ताओं में प्रो खान मोहम्मद आतिफ़ , साहित्यकार सलमान बशर , प्रो मसूदुल हसन , अमीर हैदर और रिटायर्ड आईएएस विनोद शंकर चौबे प्रमुख थे .

दिल्ली से आये रिज़वान रजा ने श्री सग़ीर अहमद को दुशाला ओढ़ाकर सम्मानित किया .

कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट के सचिव जयप्रकाश जी ने सभी का धन्यवाद दिया और कहा कि हमारी साझी विरासत जिंदा रहे इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

Ram Dutt Tripathi

राम दत्त त्रिपाठी : परिचयात्मक विवरण रामदत्त त्रिपाठी, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं.  उन्होंने 1992 से 2013 इक्कीस वर्षों तक बी बी सी लंदन के लिए कार्य किया और वह एक प्रकार से भारत मे बी बी सी की पहचान बन गये. वह उन गिने चुने पत्रकारों में से हैं , जो समाज सेवा के मिशन के लिए पत्रकारिता में आये. श्री त्रिपाठी युवावस्था में सर्वोदय और जे पी आंदोलन से जुड़े और लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के चलते इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे. श्री त्रिपाठी को अखबार  रेडियो और टी.वी. के अलावा आनलाइन  यानी तीनों प्लेट फार्म्स पर कार्य का अनुभव है। अखबारों में भी वह दैनिक , साप्ताहिक और पाक्षिक तीनों के लिए काम कर चुके हैं। 06 दिसंबरदिसम्बर 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस का सर्वप्रथम समाचार  देने वाले पत्रकार  राम दत्त त्रिपाठी ही थे.  उत्तर भारत और देश की राजनीति  में पिछले डेढ. दशक में जो सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं आर्थिक परिवर्तन आये हैं उनका कवरेज करके  रामदत्त त्रिपाठी ने पत्रकारिता में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है।अयोध्या विवाद, सामाजिक न्याय और दलित अधिकार  आंदोलन उल्लेखनीय घटनाक्रम हैं। पूर्वांचल में  इंसेफलाइटिस की महामारी जैसे विषय को भी श्री त्रिपाठी ने अपनी पैनी नज़रों से विश्वस्तरीय समाचार बनाया।   श्री त्रिपाठी ने पत्रकार के रुप में पर्यावरण, शिक्षा , स्वास्थ्य और खेती   से जुड़े विषयों पर विशेष गहन कार्य किया है।उन्होंने नेपाल के राजनीतिक घटनाक्रम और माओवादी आंदोलन का विस्तृत कवरेज किया। जान का जोखिम लेकर वह पहाड़ी, जंगली गृहयुद्द प्रभावित क्षेत्रों में अन्दर तक गये। माओवादी  नेता प्रचंड का भूमिगत रहते हुए इंटरव्यू किया जबकि उनसे मिलना असंभव और जोखिम भरा काम था. बी.बी.सी. से पहले वह साप्ताहिक संडे मेल, दैनिक अमृत प्रभात और दैनिक भारत से सम्बद्द रहे।  उन्हें युवावस्था में 1973 से 1975 तक इलाहाबाद से प्रकाशित पाक्षिक नगर स्वराज्य में काम करने का मौका मिला जिसकी प्रधान संपादक डा. महादेवी वर्मा, संपादक डा. रघुवंश और प्रकाशक सुप्रसिद्ध गांधीवादी विचारक गणितज्ञ प्रो. बनवारी लाल शर्मा थे.  लोकतंत्र और विचार स्वातंत्र्य की प्रतिबद्दता के चलते श्री त्रिपाठी ने पूरी इमरजेंसी बनारस और नैनी सेंट्रल जेल में गुजारी.1977 में देश में लोक तंत्र की बहाली के बाद बाद समाज सेवा के उद्देश्य से पूर्णकालिक पत्रकार बन गये.  श्री त्रिपाठी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी किया है. उन्होंने  पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता शुरू कर दी थी।   अवार्ड  2006 में  त्रिपाठी को पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दीसंस्थान ने गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया है. इसमें एक लाख रु नकद शामिल है.  2008 में रामदत्त त्रिपाठी के विशेष कार्यक्रम 'आओ स्कूल चलें' को प्रतिष्ठित एशिया ब्रॉडकास्टिंग यूनियन (एबीयू) अवार्ड के लिए चुना गया .इस कार्यक्रम में भारत में प्राथमिक शिक्षा की हालत की पड़ताल की गई थी. एबीयू मीडिया जगत का प्रतिष्ठित पुरस्कार है जो रेडियो और टीवी के बेहतरीन कार्यक्रमों को दिया जाता है  सामाजिक सरोकार: 1- श्री त्रिपाठी भारत में श्रमजीवी पत्रकारों के सबसे पुराने और सबसे बड़े संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स IFWJ के राष्ट्रीय सचिव रहे. 2- उ. प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष रहे. अपने कार्यकाल में उन्होंने समाचार संकलन के कार्य को सुचारू बनाने के लिए राजनीतिक दलों , शासन और पुलिस के तालमेल से अनेक व्यवस्थागत सुधार किये. 3- यू.पी. प्रेस क्लब, लखनऊ के अध्यक्ष के रूप में श्री त्रिपाठी ने प्रेस क्लब की प्रतिष्ठा बहालकर उसे समाज से जोड़ा. इससे प्रेस क्लब में साहित्यिक , सांस्कृतिक गतिविधियाँ बढ़ीं और आर्थिक निर्भरता आयी. 4 उत्तर प्रदेश पत्रकारिता संस्थान के उपाध्यक्ष और महासचिव के रूप में श्री त्रिपाठी ने सूचना के अधिकार एवं अन्य कई विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार कराये. 5 श्री त्रिपाठी लखनऊ शहर के पर्यावरण सुधार और गोमती सफाई के स्वैछिक आंदोलन में भी सक्रिय रहे हैं. 6 राम दत्त त्रिपाठी ने गंगा , यमुना और गोमती नदियों के प्रदूषण और पर्यावरण पर लगातार और गहराई से अध्ययन तथा लेखन किया है. लोकतंत्र , प्रेस की स्वतंत्रता , सामाजिक समता और सौहार्द , समाज कल्याण , ग्राम स्वराज्य तथा रचनात्मक कार्यों में विशेष अभिरुचि एवं सक्रियता से श्री त्रिपाठी को समाज में विशेष सम्मान और स्थान मिला है. शिक्षा – बी.ए., एल.एल.बी. इलाहाबाद विश्वविद्यालय. जन्म तिथि – 12 नवंबर 1953 . सम्पर्क सूत्र – 55 गुलिस्तां कालोनी, लखनऊ 226001. फोन – 0522 -2236762 मोबाइल – 98390-12810 E-Mail: ramdutt.tripathi@gmail.com

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