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क्या चुनाव में मौलिक अधिकार कम हो जाते हैं ? 

उ प्र में चुनाव आचार संहिता लागू होते ही चारों तरफ पुलिस का डंडा चलने लगा है . यहॉं तक कि एक मंत्री की प्रशंसा करने पर मुकदमा हो गया. राज्य की मतदाता सूची में पचीस लाख युवा मतदाता जुड़े हैं और समाजवादी पार्टी पर कब्जे को लेकर झगड़ा , लखनऊ के अखबारों में आज यह मुख्य खबरें हैं , जिन पर हम चर्चा करेंगे. अमर उजाला के पहले पन्ने पर खबर छपी है कि गोंडा में हुए एक कवि सम्मेलन में एक कवि ने कैबिनेट मंत्री विनोद सिंह उर्फ पंडित सिंह की शान में कविता पढी . एक कविता के बोल थे – सब दुखों में हैं सुखदायक पंडित सिंह , बनेंगे फिर इस बार विधायक पंडित सिंह . 

जैसे ही यह बात फ्लाइंग स्क्वाड के मजिस्ट्रेट को पता चली , उन्होंने कवि और कवि सम्मेलन के आयोजक दोनों पर आचार संहिता के उल्लंघन का मुकदमा थानें में दर्ज करा दिया. 

पहली बात तो अभी जब तक नामांकन नहीं हुआ कोई उम्मीदवार नहीं है , दूसरे क्या चुनाव के दौरान अभिव्यक्ति की आजादी खत्म हो जाती है ? चुनाव में अगर कोई किसी की तारीफ नहीं करेगा तो फिर प्रचार कैसे करेगा , मेरी तो समझ में नहीं आता. 

इतना ही कई जगह से यह खबरें भी आयी हैं कि पुलिस ने राजनीतिक दलों के झंडे जब्त कर लिए या फिर घरों में लगे झंडे उतरवा दिये . मेरी तो समझ में नहीं आ रहा कि इसका क्या आधार है . क्या केवल अखबारों , रेडियो और टी वी पर विज्ञापन देकर ही चुनाव प्रचार किया जा सकता है और उसमें आम नागरिकों की कोई भूमिका नहीं हो सकती? 

चुनाव आयोग के आॉंकडों के अनुसार इस बार उ प्र के विधान सभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या बढकर चोदह करोड़ बारह लाख हो गयी है . अखबारों ने इस बात को हाईलाइट किया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में युवक युवतियों ने बढ चढकर हिस्सा लिया . इस तरह करीब पचीस लाख नये युवा वोटर बनें हैं , जो पहली बार मतदान में हिस्सा लेंगे. 

चुनाव को लेकर युवाओं में उत्साह निश्चय ही खुशी की बात है . इस युवा वर्ग को ध्यान में रखकर ही अब राजनीतिक दल और प्रत्याशी प्रचार के लिए सोशल मीडिया को माध्यम बना रहे हैं.

लोकल अखबारों ने इस बात को भी रेखांकित किया है कि उ प्र की राजनीति में आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है , क्योंकि समाजवादी पार्टी में झगडें को लेकर आज चुनाव आयोग में सुनवाई है. 

ज्यादातर खबरों में अनुमान लगाया है कि अगर साइकिल निशान जब्त हो गया तो मुलायम सिंह और उनके बेटे अखिलेश यादव के पास क्या विकल्प हैं ? एक खबर यह है कि मुलायम सिंह चौधरी चरण सिंह की पुरानी पार्टी लोक दल के खेत जोतते हुए किसान निशान को अपना सकते हैं . इसके लिए पुराने लोक दल के अध्यक्ष सुनील सिंह के साथ उनकी बात हो चुकी है. अटकलें हैं कि अखिलेश गुट चुनाव आयोग से मोटर साइकिल निशान मांग सकता है.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर दी है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रियंका गॉंधी को जन्म दिन की बधाई का संदेश भेजा है . इंडियन एक्सप्रेस की खबर है कि मुख्यमंत्री की सांसद पत्नी डिम्पल यादव और प्रियंका गॉंधी दोनों मिलकर एक साथ चुनाव प्रचार कर सकती हैं. 

लेकिन यह तभी होगा जब दोंनों के बीच चुनावी गठबंधन फाइनल हो जाये. 

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