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ए के शर्मा ने यूपी की राजनीति में जलवा दिखाना शुरू किया

आई ए एस अफ़सर से नेता बने अरविंद कुमार शर्मा ए के शर्मा ने नयी ट्रेन चलवाकर यूपी की राजनीति में अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया है. रेल मंत्रालय ने उनके कहने पर पूर्वांचल के मऊ के लिए एक नयी ट्रेन चला दी है. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने स्वयं अपने ट्विटर हैंडल से यह जानकारी दी. ट्वीट में इस बात का विशेष उल्लेख है कि टर्न का संचालन उत्तर प्रदेश विधान परिषद ए कि शर्मा के विशेष आग्रह पर रेलवे ने स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू किया है.

अरविंद कुमार शर्मा ए के शर्मा ने स्वयं भी ट्वीट करके लोगों को नयी ट्रेन चलने की सूचना दी. श्री शर्मा ने कहा कि, “उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस पर यह हमारे लिए बड़ी मदद है. उन्होंने प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को धन्यवाद दिया.

श्री शर्मा ने इस तरह ए के शर्मा ने ट्रेन चलवाकर यूपी की राजनीति में अपना जलवा दिखा दिया और फिर से साबित किया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद अफ़सर रहे हैं और उन्हीं के कारण राजनीति में आए हैं.

कहा जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी के पूर्वांचल के बनारस से लोक सभा चुनाव लड़ने में भी ए के शर्मा का हाथ रहा है.

अरविंद कुमार शर्मा ए के शर्मा के नौकरी छोड़कर राजनीति में शामिल होते ही उत्तर प्रदेश में भूचाल सा आ गया. अटकलें लगीं कि शर्मा को योगी सरकार में नम्बर दो बनाकर बड़ी ज़िम्मेदारी दी जाएगी. पूर्वांचल के लोग और भारतीय जनता पार्टी के नेता उन्हें बधाई देने पहुँचने लगे.

लेकिन जब अरविंद कुमार शर्मा लखनऊ में भाजपा में शामिल हुए तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में थे. मुख्यमंत्री से उनकी मुलाक़ात में भी काफ़ी समय लग गया.

इसके बाद ही भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा, संघ के प्रभारी महामंत्री बी एल संतोष एवं उत्तर प्रदेश से सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी दो दिन के लिए लखनऊ आए. इन लोगों ने पार्टी विधायकों, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं से योगी सरकार के काम काज और कमियों के बारे में तमाम जानकारी एकत्र की. समझा जाता है कि अब शीघ्र ही उत्तर प्रदेश सरकार में कोई बड़ा फेरबदल होगा.

इस फेरबदल में कुछ नए मंत्री बैन सकते हैं और कुछ हटाए भी जा सकते हैं. पर अभी यह अभी साफ़ नहीं है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सत्ता और अधिकार किस हैड तक शेयर करते हैं.

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राम दत्त त्रिपाठी : परिचयात्मक विवरण रामदत्त त्रिपाठी, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं.  उन्होंने 1992 से 2013 इक्कीस वर्षों तक बी बी सी लंदन के लिए कार्य किया और वह एक प्रकार से भारत मे बी बी सी की पहचान बन गये. वह उन गिने चुने पत्रकारों में से हैं , जो समाज सेवा के मिशन के लिए पत्रकारिता में आये. श्री त्रिपाठी युवावस्था में सर्वोदय और जे पी आंदोलन से जुड़े और लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के चलते इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे. श्री त्रिपाठी को अखबार  रेडियो और टी.वी. के अलावा आनलाइन  यानी तीनों प्लेट फार्म्स पर कार्य का अनुभव है। अखबारों में भी वह दैनिक , साप्ताहिक और पाक्षिक तीनों के लिए काम कर चुके हैं। 06 दिसंबरदिसम्बर 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस का सर्वप्रथम समाचार  देने वाले पत्रकार  राम दत्त त्रिपाठी ही थे.  उत्तर भारत और देश की राजनीति  में पिछले डेढ. दशक में जो सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं आर्थिक परिवर्तन आये हैं उनका कवरेज करके  रामदत्त त्रिपाठी ने पत्रकारिता में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है।अयोध्या विवाद, सामाजिक न्याय और दलित अधिकार  आंदोलन उल्लेखनीय घटनाक्रम हैं। पूर्वांचल में  इंसेफलाइटिस की महामारी जैसे विषय को भी श्री त्रिपाठी ने अपनी पैनी नज़रों से विश्वस्तरीय समाचार बनाया।   श्री त्रिपाठी ने पत्रकार के रुप में पर्यावरण, शिक्षा , स्वास्थ्य और खेती   से जुड़े विषयों पर विशेष गहन कार्य किया है।उन्होंने नेपाल के राजनीतिक घटनाक्रम और माओवादी आंदोलन का विस्तृत कवरेज किया। जान का जोखिम लेकर वह पहाड़ी, जंगली गृहयुद्द प्रभावित क्षेत्रों में अन्दर तक गये। माओवादी  नेता प्रचंड का भूमिगत रहते हुए इंटरव्यू किया जबकि उनसे मिलना असंभव और जोखिम भरा काम था. बी.बी.सी. से पहले वह साप्ताहिक संडे मेल, दैनिक अमृत प्रभात और दैनिक भारत से सम्बद्द रहे।  उन्हें युवावस्था में 1973 से 1975 तक इलाहाबाद से प्रकाशित पाक्षिक नगर स्वराज्य में काम करने का मौका मिला जिसकी प्रधान संपादक डा. महादेवी वर्मा, संपादक डा. रघुवंश और प्रकाशक सुप्रसिद्ध गांधीवादी विचारक गणितज्ञ प्रो. बनवारी लाल शर्मा थे.  लोकतंत्र और विचार स्वातंत्र्य की प्रतिबद्दता के चलते श्री त्रिपाठी ने पूरी इमरजेंसी बनारस और नैनी सेंट्रल जेल में गुजारी.1977 में देश में लोक तंत्र की बहाली के बाद बाद समाज सेवा के उद्देश्य से पूर्णकालिक पत्रकार बन गये.  श्री त्रिपाठी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी किया है. उन्होंने  पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता शुरू कर दी थी।   अवार्ड  2006 में  त्रिपाठी को पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दीसंस्थान ने गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया है. इसमें एक लाख रु नकद शामिल है.  2008 में रामदत्त त्रिपाठी के विशेष कार्यक्रम 'आओ स्कूल चलें' को प्रतिष्ठित एशिया ब्रॉडकास्टिंग यूनियन (एबीयू) अवार्ड के लिए चुना गया .इस कार्यक्रम में भारत में प्राथमिक शिक्षा की हालत की पड़ताल की गई थी. एबीयू मीडिया जगत का प्रतिष्ठित पुरस्कार है जो रेडियो और टीवी के बेहतरीन कार्यक्रमों को दिया जाता है  सामाजिक सरोकार: 1- श्री त्रिपाठी भारत में श्रमजीवी पत्रकारों के सबसे पुराने और सबसे बड़े संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स IFWJ के राष्ट्रीय सचिव रहे. 2- उ. प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष रहे. अपने कार्यकाल में उन्होंने समाचार संकलन के कार्य को सुचारू बनाने के लिए राजनीतिक दलों , शासन और पुलिस के तालमेल से अनेक व्यवस्थागत सुधार किये. 3- यू.पी. प्रेस क्लब, लखनऊ के अध्यक्ष के रूप में श्री त्रिपाठी ने प्रेस क्लब की प्रतिष्ठा बहालकर उसे समाज से जोड़ा. इससे प्रेस क्लब में साहित्यिक , सांस्कृतिक गतिविधियाँ बढ़ीं और आर्थिक निर्भरता आयी. 4 उत्तर प्रदेश पत्रकारिता संस्थान के उपाध्यक्ष और महासचिव के रूप में श्री त्रिपाठी ने सूचना के अधिकार एवं अन्य कई विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार कराये. 5 श्री त्रिपाठी लखनऊ शहर के पर्यावरण सुधार और गोमती सफाई के स्वैछिक आंदोलन में भी सक्रिय रहे हैं. 6 राम दत्त त्रिपाठी ने गंगा , यमुना और गोमती नदियों के प्रदूषण और पर्यावरण पर लगातार और गहराई से अध्ययन तथा लेखन किया है. लोकतंत्र , प्रेस की स्वतंत्रता , सामाजिक समता और सौहार्द , समाज कल्याण , ग्राम स्वराज्य तथा रचनात्मक कार्यों में विशेष अभिरुचि एवं सक्रियता से श्री त्रिपाठी को समाज में विशेष सम्मान और स्थान मिला है. शिक्षा – बी.ए., एल.एल.बी. इलाहाबाद विश्वविद्यालय. जन्म तिथि – 12 नवंबर 1953 . सम्पर्क सूत्र – 55 गुलिस्तां कालोनी, लखनऊ 226001. फोन – 0522 -2236762 मोबाइल – 98390-12810 E-Mail: ramdutt.tripathi@gmail.com

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