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भ्रष्टाचार का मुख्य स्रोत है राजनीति

भ्रष्टाचार पर राम दत्त त्रिपाठी
राम दत्त त्रिपाठी

भारतीय पुलिस सेवा के दो अधिकारी दो दिनों के अंदर भ्रष्टाचार में निलंबित किये गये हैं। ये जिलों की कप्तानी कर रहे थे।

इसे किस तरह देखा जाये?

क्या इसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की उपलब्धियों में गिना जाये।

अथवा क्या इसे सरकार नाकामी माना जाये?

पिछले साल ही नोएडा के पुलिस कप्तान ने एक लंबा पत्र लिखकर बताया था कि कप्तानों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर रिश्वत चल रही है

जिन ज़िलों के लिए इशारा था, उनके साथ-साथ शिकायतकर्ता को भी ज़िले के चार्ज से हटा दिया गया।

जॉंच बैठी मगर पता नहीं क्या हुआ?

पुलिस कप्तानों की नियुक्ति शासन के सर्वोच्च स्तर से होती है।

अफ़सरों का पूरा चिट्ठा सामने होता है।

उसके बाद भी अगर रिश्वत देकर या राजनीतिक पहुँच से कोई अधिकारी कप्तानी पा जाता है, तो हम उनसे क्या अपेक्षा करेंगे?

निश्चय ही वह थाने बेंचेंगे, गिट्टी-मोरंग ढोने वाले ट्रक वालों से पैसे वसूलेंगे।

माफिया को संरक्षण देंगे। सत्ताधारी दल के नेताओं के ग़लत कार्यों को संरक्षण देंगे।

बाक़ी सेवाएँ भी अछूती नहीं हैं।

खबरें आ रही हैं कि कोरोना की रोकथाम के लिए जो किट्स ख़रीदी गयीं, उनमें भारी कमीशन लिया गया।

अस्पतालों में डाक्टरों के लिए जो पर्सनल प्रोटेक्शन किट ख़रीदी गयीं वह बहुत घटिया दर्जे की थीं।

भ्रष्टाचार का दीमक हमारे सिस्टम में हर जगह घुस गया है।

नियुक्ति, तबादला, पोस्टिंग, ठेका, कोटा हर जगह।

जिन पर भ्रष्टाचार रोकने की ज़िम्मेदारी, वही उसमें लिप्त

दुर्भाग्य है कि आल इंडिया सर्विसेज़ के जिन अधिकारियों को संविधान का संरक्षण है, अच्छा वेतन, बंगला, गाड़ी जैसी ज़रूरी सुविधाएँ हैं, उनमें कदाचार अब आम बात हो गयी है।

या कहें कि जिन पर भ्रष्टाचार रोकने की ज़िम्मेदारी है वही उसमें लिप्त हो गये हैं।

जेपी आंदोलन के दौरान हमारी प्रमुख मॉंग थी कि भ्रष्टाचार रोकने लिए लोकायुक्त नियुक्त हों वही निष्क्रिय या भ्रष्टाचार के आरोप से घिर गये।

अन्ना आंदोलन से उपजी सरकार ने भी सिस्टम या कार्य प्रणाली में कोई ठोस बदलाव नहीं किया।

समाज भ्रष्टाचार की स्वीकृति बढ़ती जा रही है।

खर्चीली चुनाव प्रणाली में ईमानदार राजनीतिक कार्यकर्ता का संसद विधान सभा पहुँचना असंभव सा होता जा रहा है।

संसद और विधानसभाओं का चरित्र बदले बिना भ्रष्टाचार उन्मूलन की बात सोचना भी बेकार है।

अंततः सब कुछ राजनीति से ही कंट्रोल होता है।

राजनीति ही भ्रष्टाचार का मुख्य स्रोत है, उसको बदले बिना कोई सार्थक बदलाव असंभव है।

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Ram Dutt Tripathi

राम दत्त त्रिपाठी : परिचयात्मक विवरण रामदत्त त्रिपाठी, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं.  उन्होंने 1992 से 2013 इक्कीस वर्षों तक बी बी सी लंदन के लिए कार्य किया और वह एक प्रकार से भारत मे बी बी सी की पहचान बन गये. वह उन गिने चुने पत्रकारों में से हैं , जो समाज सेवा के मिशन के लिए पत्रकारिता में आये. श्री त्रिपाठी युवावस्था में सर्वोदय और जे पी आंदोलन से जुड़े और लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के चलते इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे. श्री त्रिपाठी को अखबार  रेडियो और टी.वी. के अलावा आनलाइन  यानी तीनों प्लेट फार्म्स पर कार्य का अनुभव है। अखबारों में भी वह दैनिक , साप्ताहिक और पाक्षिक तीनों के लिए काम कर चुके हैं। 06 दिसंबरदिसम्बर 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस का सर्वप्रथम समाचार  देने वाले पत्रकार  राम दत्त त्रिपाठी ही थे.  उत्तर भारत और देश की राजनीति  में पिछले डेढ. दशक में जो सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं आर्थिक परिवर्तन आये हैं उनका कवरेज करके  रामदत्त त्रिपाठी ने पत्रकारिता में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है।अयोध्या विवाद, सामाजिक न्याय और दलित अधिकार  आंदोलन उल्लेखनीय घटनाक्रम हैं। पूर्वांचल में  इंसेफलाइटिस की महामारी जैसे विषय को भी श्री त्रिपाठी ने अपनी पैनी नज़रों से विश्वस्तरीय समाचार बनाया।   श्री त्रिपाठी ने पत्रकार के रुप में पर्यावरण, शिक्षा , स्वास्थ्य और खेती   से जुड़े विषयों पर विशेष गहन कार्य किया है।उन्होंने नेपाल के राजनीतिक घटनाक्रम और माओवादी आंदोलन का विस्तृत कवरेज किया। जान का जोखिम लेकर वह पहाड़ी, जंगली गृहयुद्द प्रभावित क्षेत्रों में अन्दर तक गये। माओवादी  नेता प्रचंड का भूमिगत रहते हुए इंटरव्यू किया जबकि उनसे मिलना असंभव और जोखिम भरा काम था. बी.बी.सी. से पहले वह साप्ताहिक संडे मेल, दैनिक अमृत प्रभात और दैनिक भारत से सम्बद्द रहे।  उन्हें युवावस्था में 1973 से 1975 तक इलाहाबाद से प्रकाशित पाक्षिक नगर स्वराज्य में काम करने का मौका मिला जिसकी प्रधान संपादक डा. महादेवी वर्मा, संपादक डा. रघुवंश और प्रकाशक सुप्रसिद्ध गांधीवादी विचारक गणितज्ञ प्रो. बनवारी लाल शर्मा थे.  लोकतंत्र और विचार स्वातंत्र्य की प्रतिबद्दता के चलते श्री त्रिपाठी ने पूरी इमरजेंसी बनारस और नैनी सेंट्रल जेल में गुजारी.1977 में देश में लोक तंत्र की बहाली के बाद बाद समाज सेवा के उद्देश्य से पूर्णकालिक पत्रकार बन गये.  श्री त्रिपाठी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी किया है. उन्होंने  पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता शुरू कर दी थी।   अवार्ड  2006 में  त्रिपाठी को पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दीसंस्थान ने गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया है. इसमें एक लाख रु नकद शामिल है.  2008 में रामदत्त त्रिपाठी के विशेष कार्यक्रम 'आओ स्कूल चलें' को प्रतिष्ठित एशिया ब्रॉडकास्टिंग यूनियन (एबीयू) अवार्ड के लिए चुना गया .इस कार्यक्रम में भारत में प्राथमिक शिक्षा की हालत की पड़ताल की गई थी. एबीयू मीडिया जगत का प्रतिष्ठित पुरस्कार है जो रेडियो और टीवी के बेहतरीन कार्यक्रमों को दिया जाता है  सामाजिक सरोकार: 1- श्री त्रिपाठी भारत में श्रमजीवी पत्रकारों के सबसे पुराने और सबसे बड़े संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स IFWJ के राष्ट्रीय सचिव रहे. 2- उ. प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष रहे. अपने कार्यकाल में उन्होंने समाचार संकलन के कार्य को सुचारू बनाने के लिए राजनीतिक दलों , शासन और पुलिस के तालमेल से अनेक व्यवस्थागत सुधार किये. 3- यू.पी. प्रेस क्लब, लखनऊ के अध्यक्ष के रूप में श्री त्रिपाठी ने प्रेस क्लब की प्रतिष्ठा बहालकर उसे समाज से जोड़ा. इससे प्रेस क्लब में साहित्यिक , सांस्कृतिक गतिविधियाँ बढ़ीं और आर्थिक निर्भरता आयी. 4 उत्तर प्रदेश पत्रकारिता संस्थान के उपाध्यक्ष और महासचिव के रूप में श्री त्रिपाठी ने सूचना के अधिकार एवं अन्य कई विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार कराये. 5 श्री त्रिपाठी लखनऊ शहर के पर्यावरण सुधार और गोमती सफाई के स्वैछिक आंदोलन में भी सक्रिय रहे हैं. 6 राम दत्त त्रिपाठी ने गंगा , यमुना और गोमती नदियों के प्रदूषण और पर्यावरण पर लगातार और गहराई से अध्ययन तथा लेखन किया है. लोकतंत्र , प्रेस की स्वतंत्रता , सामाजिक समता और सौहार्द , समाज कल्याण , ग्राम स्वराज्य तथा रचनात्मक कार्यों में विशेष अभिरुचि एवं सक्रियता से श्री त्रिपाठी को समाज में विशेष सम्मान और स्थान मिला है. शिक्षा – बी.ए., एल.एल.बी. इलाहाबाद विश्वविद्यालय. जन्म तिथि – 12 नवंबर 1953 . सम्पर्क सूत्र – 55 गुलिस्तां कालोनी, लखनऊ 226001. फोन – 0522 -2236762 मोबाइल – 98390-12810 E-Mail: ramdutt.tripathi@gmail.com

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